चालाकी काम न आई, आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द
पिछले 2 सालों से आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता खतरे में थी। मामला था विधायकों के लिए लाभ का पद का उपयोग। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी की सरकार बनते ही अरविंद केजरीवाल ने अपने 20 विधायकों को संसदीय सचिव बना दिया था। लाभ के पद का मामला चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति के पर अनुमोदन के लिए भेजा था। चुनाव आयोग के सिफारिश को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 21 दिसम्बर 2017 को मंज़ूरी दे दी। अपनी सदस्यता खोने वाले सारे विधायकों के नाम हैं:
1. आदर्श शास्त्री, द्वारका
2. अल्का लांबा, चांदनी चौक
3. अनिल वाजपेई, गांधी नगर
4. अवतार सिंह, कालकाजी
5. कैलाश गहलौत, नजफगढ़
6. मदनलाल, कस्तूरबा नगर
7. मनोज कुमार, कोंडली
8. नरेश यादव, महरौली
9. नितिन त्यागी, लक्ष्मी नगर
10. प्रवीण कुमार, जंगपुरा
11. राजेश गुप्ता, वजीरपुर
12. राजेश ऋषि, जनकपुरी
13. संजीव झा, बुराड़ी
14. सरिता सिंह, रोहतास नगर
15. सोम दत्त, सदर बाज़ार
16. शरद कुमार, नरेला
17. शिव चरण गोयल, मोती नगर
18. सुखबीर सिंह, मुंडका
19. विजेंद्र गर्ग, राजेंद्र नगर
20. जरनैल सिंह, तिलक नगर
हालांकि इस निर्णय के आने से पहले ही आम आदमी पार्टी के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर हमले बोलना शुरू कर दिया था। लेकिन ‘आप’ के इन आरोपों का कोई फर्क नहीं पड़ा। राष्ट्रपति के इस फैसले के बाद आम आदमी के समर्थकों के राष्ट्रपति तक को नहीं बक्सा और ‘ठुल्लू’ जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल तक कर दिया।
Not a single bill which is passed Delhi assembly is signed President in last 3 years but that ‘thullu’ signed disqualification order of 20 MLAs in 1 day.. thats too on Sunday ?
— Kapil (@kapsology) January 21, 2018
प्रधानमंत्री मोदी, दिल्ली के उपराज्यपाल, चुनाव आयोग और अब राष्ट्रपति… आम आदमी पार्टी के नेताओं ने सभी संवैधानिक संस्थाओं पर कीचड़ उछाले हैं। ऐसा चलता रहा तो ये लोग उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक को गाली देंगे। वर्तमान में विधायक और केजरीवाल के पूर्व मंत्री रहे कपिल मिश्रा ने चुटकी लेते हुये ट्वीट किया:
घुँघरू सेठ का एक्शन प्लान –
तीन दिन पहले – EVM को गाली
दो दिन पहले – चुनाव आयोग को गाली
एक दिन पहले – चुनाव आयुक्त को गाली
आज – राष्ट्रपति पर निशाना
कल – हाइकोर्ट पर उँगली
परसो – सुप्रीम कोर्ट गलत
20 सीटों का रिजल्ट आने पर – दिल्ली की जनता पर ही उठाएंगे सवाल
— Kapil Mishra (@KapilMishra_IND) January 22, 2018
कपिल मिश्रा ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि जब संसदीय सचिव के पद इन 20 विधायकों को दिए गए तब कानूनी विशेषज्ञों की राय यही थी कि ये असंवैधानिक हैं, अगर चुनाव आयोग में शिकायत हुई तो सदस्यता रद्द हो जाएगी लेकिन इसके बावजूद ये पद दिए गए। मतलब साफ है कि केजरीवाल ने जान बुझ कर आ संवैधानिक काम किया। भारत की राजनीति में यह एक नए तरह का भ्रष्टाचार है। हालांकि आम आदमी पार्टी का कहना है कि वो लोग कोर्ट जाएँगे, लेकिन इस मसले पर उन्हे राहत मिलने कि संभावना कम ही है, क्योंकि यह मामला संवैधानिक संस्थाओं के नियमों के उल्लंघन का है।
Interested in internal and external security of India. Security Analyst, Diplomacy Scholar, #CyberSecurity and #FinancialSecurity expert.

